Secret_of_Bible
ईसा मसीह परमेश्वर नहीं थे, उन्होंने हमेशा स्वयं को परमेश्वर का पुत्र कह कर सम्बोधित किआ था।
परमेश्वर यानी की पूर्ण अविनाशी परमात्मा कभी माता की गर्भ से जन्म नहीं लेता ना ही उसकी मृत्यु हो सकती है। परमात्मा की परिभाषा भी यही है की वह परम आत्मा जो जन्म और मृत्यु के बंधन से परे हो जो हमे पूर्ण मोक्ष प्रदान कर सके।
लेकिन ईसा मसीह जी के माता पिता थे, इनकी पूज्य माता जी का नाम मरियम तथा पूज्य पिता जी का नाम यूसुफ था। परन्तु मरियम को गर्भ एक देवता से रहा था। देवता से गर्भवती हुई मरियम ने ईसा को जन्म दिया। हजरत ईसा से पवित्र ईसाई धर्म की स्थापना हुई। ईसा मसीह के नियमों पर चलने वाले भक्त आत्मा ईसाई कहलाए तथा पवित्र ईसाई धर्म का उत्थान हुआ।
हम सभी जानते ईसा मसीह ने ज़िन्दगी भर कैसे कष्ट झेले व् उनकी मृत्यु कितनी दर्दनाक थी।
हजरत ईसा मसीह की मृत्यु 30 वर्ष की आयु में हुई जो पूर्व ही निर्धारित थी।
यह सिर्फ संत रामपालजी महाराज ने शास्त्र प्रमाणित करके बताया है की पूर्ण अविनाशी परमात्मा सिर्फ कबीर साहेब है जिसका वर्णन पवित्र बाइबिल, पवित्र क़ुरान शरीफ, हिन्दू सत्ग्रन्थ व् गुरु ग्रन्थ साहिब में साफ लिखित है।
अय्यूब 36:5 (और्थोडौक्स यहूदी बाइबल -OJB) में लिखा है की “परमेश्वर कबीर (शक्तिशाली) है, किन्तु वह लोगों से घृणा नहीं करता है।
परमेश्वर कबीर (सामर्थी) है और विवेकपूर्ण है।"
बाइबल ने भी स्पष्ट किया है की प्रभु का नाम कबीर है।अनुवाद कर्ताओ नें कबीर की जगह शक्तिशाली व सामर्थ वाला लिख दिया है। वास्तव में परमात्मा का नाम कबीर (कविर्देव) है।
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