#EternalHome_Satlok

आईए दोस्तो 
जानते हैं


के बारे में जहाँ कभी 
किसी की म्रत्यु नही होती...

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पवित्र गीता जी अध्याय 18 श्लोक 62 से 66 के अनुसार...
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 "सतलोक"  स्वर्ग और महास्वर्ग से अलग वो स्थान है जहां जाने के बाद प्राणी संसार मे लौट कर नही आते यहां के सभी जीवों का असली ठिकाना शास्वत स्थान सतलोक ही है...
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सतलोक में एक तत्व का बना नूरी शरीर है। उसमें कोई रोग या बीमारी नहीं होती...
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सतलोक में पृथ्वी की तरह कोई प्रदूषण नही है, न वहां प्राकृतिक आपदा या कोई महामारी होती...
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अमरलोक जाने के लिए पूर्ण सन्त की शरण लेकर शास्त्रनुकूल सतभक्ति करनी पड़ती है तभी पूर्ण मोक्ष प्राप्त हो सकता है..

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सतलोक सुख का सागर है वहां किसी वस्तु का अभाव नहीं वहां सभी वस्तुओं का भंडार भरा पड़ा है
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सदा ही सदवहार वृक्ष लगे रहते हैं
किसी भी मौसम का कोई कहर नही है...
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पृथ्वी पर इंसान भूखे रहते हैं वस्तुओं के अभाव में कष्ट पाते हैं। 
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सतलोक में पृथ्वी की तरह कोई युद्ध, लड़ाई झगड़े, राग द्वेष लड़ाई झगड़े आदि नहीं होते...

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 क्योंकि वहां किसी चीज़ की कमी नहीं
सबका अलग स्थान है। सबके अपने निजी विमान हैं। कोई अमीर गरीब का भेद नहीं है...

सतलोक में वृद्धावस्था नहीं है न ही मृत्यु। वहां स्त्री पुरुष सदा 20- 20 की उम्र के जवान रहते हैं। 
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जबकि इस मृतलोक का तो विधान है वृद्धावस्था व मृत्यु
और एक दिन मिट्टी में मिल जाना

दोस्तो🙏
पृथ्वी लोक का राजा काल है जो सब प्राणियों को धोखे में रखता है, 
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प्रतिदिन एक लाख मनुष्यों का आहार करता है, मारता है अपनी निराकार शक्ति का प्रयोग करके गधे कुत्ते सूअर बनाता है। 

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जबकि #सतलोक का मालिक दयालु परमात्मा #कविर्देव है... जो सबके रक्षक है...

सतलोक ऐसा अमर लोक है जहाँ एक हंस आत्मा के शरीर का तेज 16 सूर्यों के समान है लेकिन उसमें गर्मी नहीं है...

दोस्तो
जैसा कि 
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गीता अध्याय 15 के श्लोक 4 में कहा गया है कि तत्वदर्शी संत की खोज करने के बाद उस परमेश्वर के परम् पद अर्थात सतलोक की खोज करनी चाहिए जहाँ जाने के बाद प्राणी का जन्म मरण नहीं होता

प्रिय पाठकों🙏

अनेक महान आत्माएं
जैसे
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गुरु नानक,धर्मदास जी, गरीब दास जी महाराज,घीसा दास, दादू जी सभी ने सतलोक को देखा और सतलोक में विराजमान कबीर परमात्मा को देखा...
फिर इन महापुरुषों ने कबीर परमात्मा की कलमतोड़ महिमा लिखी
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संत गरीब दास जी की वाणी में वर्णन है कि सतलोक में कितना सुख है
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मन तू चल रे सुख के सागर, जहाँ शब्द सिंधू रत्नागर।।
जहां संखो लहर महर की उपजे, कहर नहीं जहाँ कोई।
दास गरीब अचल अविनाशी, सुख का सागर सोई।।

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दोस्तो सभी धर्मों के पवित्र शास्त्रों
में सतलोक और उसके मालिक की महिमा लिखी है

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लेकिन किसी विडंबना है कि 
आज के धर्म के नकली ठेकेदारों
को जगतगरू रामपालजी महाराज के अतिरिक्त अपने ही पवित्र शास्त्रों का पूर्ण ज्ञान नही है

जैसा कि
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 ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 18 में प्रमाण है कि पूर्ण परमात्मा कविर्देव तीसरे मुक्ति धाम अर्थात् सतलोक में रहता है। जहाँ जाने के बाद मनुष्य का फिर से जन्म मरण नहीं होता है
और संसार में लौटकर नही आते

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सतलोक में सभी मनुष्यों के पास अपने घर हैं और सभी के पास पुष्पक विमान हैं। सतलोक में बाग-बगीचे हमेशा हरे भरे रहते है...

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सतलोक में केवल पूर्ण संत रामपाल जी महाराज जी से नाम उपदेश लेने के बाद ही जाया जा सकता है, अन्य कोई तरीका नहीं है। उन्हें पहचानिए और उनकी शरण ग्रहण कीजिये...

अधिक जानकारी के लिए देखिये प्रतिदिन साधना टी वी चैनल शाम 7:30 बजे।

सत साहेब जी
    🙇🙏

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