भक्त मीराबाई की कथा

मीरा बाई की कथा
मीरा बाई का जन्म राजपूत जाति में हुआ था। महिलाओं को घर से बाहर जाने पर प्रतिबंध था, परंतु मीराबाई ने किसी की प्रवाह नहीं की। फिर उसका विवाह राजा से हो गया। राणा जी धार्मिक विचार के थे। उसने मीरा को मंदिरों में जाने से नहीं रोका, अपितु लोक चर्चा से बचने के लिए मीरा जी के साथ तीन-चार महिला नौकरानी भेजने लगा। जिस कारण से सब ठीक चलता रहा। कुछ वर्ष पश्चात् मीरा जी के पति की मृत्यु हो गई। देवर राजगद्दी पर बैठ गया। उसने कुल के लोगों के कहने से मीरा को मंदिर में जाने से मना किया, परंतु मीराबाई जी नहीं मानी। जिस कारण से राजा ने मीरा को मारने का षड़यंत्र रचा। विचार किया कि ऐसी युक्ति बनाई जाए कि यह भी मर जाए और बदनामी भी न हो। राजा ने विचार किया कि इसे कैसे मारें? राजा ने कहा कि सपेरे एक ऐसा सर्प ला दे कि डिब्बे को खोलते ही खोलने वाले को डंक मारे और व्यक्ति मर जाए। ऐसा ही किया गया। राणा जी ने अपने लड़के का जन्मदिन मनाया। उसमें रिश्तेदार तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति आमंत्रित किये। राजा ने मीरा जी की बांदी (नौकरानी) से कहा कि ले यह बेशकीमती हार है। मेरे बेटे का जन्मदिन है। दूर-दूर से रिश्तेदार आये हैं। मीरा को कह दे कि सुंदर कपड़े पहनकर इस हार को गले में पहन ले, नहीं तो रिश्तेदार कहेंगे कि अपनी भाभी जी को अच्छी तरह नहीं रखता। मेरी इज्जत-बेइज्जती का सवाल है। बांदी ने उस आभूषण के डिब्बे को मीराबाई को दे दिया और राजा का आदेश सुना दिया। उस आभूषण के डिब्बे में विषैला काले-सफेद रंग का सर्प था। मीरा ने बांदी के सामने ही उस डिब्बे को खोला। उसमें हीरे-मोतियों से बना हार था। मीराबाई ने विचार किया कि यदि मैं हार नहीं पहनूंगी तो व्यर्थ का झगड़ा होगा। मेरे लिए तो यह मिट्टी है। यह विचार करके मीरा जी ने वह हार गले में डाल लिया। राजा का उद्देश्य था कि आज सर्प डंक से मीरा की मृत्यु हो जाएगी तो सबको विश्वास हो जाएगा कि राजा का कोई हाथ नहीं है। हमारे सामने सर्प डसने से मीरा की मृत्यु हुई है। कुछ समय उपरांत राजा मंत्रियों सहित तथा कुछ रिश्तेदारों सहित मीरा के महल में गया तो मीरा बाई जी के गले में सुंदर मंहगा हार देखकर राणा बौखला गया और बोला, बदचलन! यह हार किस यार से लाई है? मीरा बाई जी के आँखों में आँसू थे। बोली कि आपने ही तो बांदी के द्वारा भिजवाया था, वही तो है। बांदी को बुलाया तथा पूछा कि वह डिब्बा कहाँ है? बांदी ने पलंग के नीचे से निकालकर दिखाया। यह रहा राजा जी जो आपने भेजा था। राजा वापिस आ गया। राजा ने सोचा कि अब की बार इसको विष मैं अपने सामने पिलाऊँगा, नहीं पीएगी तो सिर काट दूँगा।

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