धरती को स्वर्ग बनाना है
धरती को स्वर्ग बनाना है |
मानव उत्थान के लिए:-
भारत देश की माननीय जनता जनार्दन
तथा माननीय न्यायालय,
विषय :- मानवता के पतन तथा महिलाओं पर हो रहे यौन उत्पीड़न, कुरीतियों तथा बुराईयों
को रोकने के लिए जनहित याचिका।
निवेदन :- देश में गिरती मानवता के कारण प्रतिदिन हो रहे यौन अपराधों, महिला उत्पीड़न,
हत्याऐं, सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा भ्रष्टाचार, बैंक घोटाले, दहेज के कारण
वधुओं द्वारा की जा रही आत्महत्याऐं, उनके कारण सास-ससुर, ननद, पति व अन्य परिजन जेल में जाते
हैं। परिवार बर्बाद हो जाते हैं। नशीली वस्तुओं के सेवन से युवा वर्ग नष्ट हो रहा है। इन सबके समाधान
के लिए हमारे सतगुरू संत रामपाल दास जी द्वारा किए जा रहे प्रयत्न के जनता तक पहुँचाने में आने
वाली बाधाओं को दूर करने के लिए निवेदन।
भारतवर्ष में हम संत रामपाल दास जी महाराज के लगभग नब्बे (90) लाख अनुयाई हैं। हम
दावे के साथ कह रहे हैं कि यदि संत रामपाल दास जी के सत्संग विचार भारत की जनता सुन लेगी
तो भारत की धरती स्वर्ग बन जाएगी। इनके विचारों से प्रभावित होकर हम सब अनुयाई सामान्य तथा
सभ्य व सुखी जीवन जी रहे हैं।
‘‘मानवता के पतन का कारण’’
संसार में मानवता तथा अच्छी संस्कृति का पतन दिनो-दिन हो रहा है। कारण :-
मीडिया में युवाओं (लड़के-लड़कियों) को आकर्षित करके धन कमाने का उद्देश्य लेकर बनाई
जा रही फिल्में, जिनमें भारत की संस्कृति से हटकर दृश्य दिखाए जाते हैं जो सभ्य समाज में कभी शोभा
नहीं देते।
उदाहरण :- फिल्मों में लड़का-लड़की के प्यार की कहानी में एक-दूसरे का चुंबन करते
दिखाना। लड़की का घरवालों से छिपकर अपने प्रेमी से मिलने जाना। ऐसे ही लड़के का अपने परिवार
से छिपकर विशेष पोषाक जो सभ्य समाज में अशोभनीय है, पहनकर लड़की से मिलने जाना। समाचार
पत्रों में लड़के-लड़कियों के अर्धनग्न चित्रा या छोटी-ओच्छी पोषाक जो 2 से 8 वर्ष की लड़कियाँ पहनती
हैं, उस पोषाक को बड़ी लड़कियाँ जो 18.20 वर्ष या इनसे भी ऊपर आयु की हैं, को पहने दिखाना
जिसका दुष्प्रभाव फिल्म देखने वाली युवा लड़कियों पर पड़ता है। जिस कारण से यह दुष्प्रभाव भारत
देश के शहरों में रह रहे परिवारों के बच्चों पर प्रथम गिरता है। फिर उन शहरी परिवारों के रिश्ते-नाते
गाँवों में होते हैं। ग्रामीण लड़के-लड़कियाँ जो शहर में अपने रिश्तेदारों के घर जाते हैं तो वे उनको
देखकर गाँव में भी वैसा ही आचरण् करते हैं |

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